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मि आज वे सन्दर्भ मा लिखणु छौं जैमा हमरा संस्कारू की इति श्री ह्वे ! उत्तराखण्ड का कै जनपद धीरे धीरे खालि ह्वे गेन ईं बात से आप अनविज्ञ नि छन ! उच्च शिक्षा अर वड़िया जीवन जीणा खुण मनिख उत्तराखण्ड का अपड़ा पित्रु की थाती, गौं गुठ्यार छोड़ी दयशु प्रधशु बस गेन, चलो क्वी बात नी तरक्की सबुकि हुण चैन्द पर सवाल यो च कि क्या तरक्की कनु खुण आपणि बोली भाषा, रीती रिवाज, मान सम्मान, आदर सत्कार अर खास जु हमरा संस्कार छन क्या उ छवडणा जरूरी छन ? आज हमरू समाज, हमरा रीती रिवाज अर हमरा संस्कार कख हरचिनि ! क्या हम थैं अब ऊं सबु की क्वी जर्वत नी रैगी ? युंई प्रशनु फर म्यारू चिन्तन च ! मी आप थै एक एक बात बताणै कोशिश कनू छौं कि आखिर संस्कार गैन त कख गैन ?
जब व्यो हुंद छा डली जांदि छै न्यूतेर आंदा छा, पिठै लगैकि मान सम्मान हुंदु छा जै घारा मा कारिज हुंदु छा वे घारा दाना सयणा बडु स्वागत करदा छा ! खुट्युँ स्यवा लगिदि छै ! छुयुँ की छर्वळि अर खुद विसरांदा छा, फिर द्यौ द्यबतों कु नौ लेकि पंडौ नचदा छा ब्वरियुँ का मुंडम सपिगि अफु से बडौं कु मान अर दगड़ हुन्द छा लाज शरम जु संस्कारू की बुनियाद छै !
अब फोन फर कार्ड आणा छन न्यूता गूगल ल भ्यजणा छन राति कोकटेल अर डी जे कु हल्ला हुँयु, कु आ कु नि आ जै घारम ब्यो हुणू उँथै की पता नि चलणु ब्वारि, स्वसरू, जिठणु, दयुरू सैब दगिड़ि नचणा छन कट स्लीव बिलोज पैरी सपिगि लापता हुँई ! न स्यवा सौंळी न रामा रूमी सिर्फ हैलो हाई हुणु ! जै पंडाळ मा घबतौ कु आवहन हुण वेई पंडाळ म मुर्गा अर बखुरु बणनू त अच्छे आला द्यो द्यबता वख आर्शिवाद दीणू ! बिचरा दाना घारम यखुलि कपाल पखड़ि बैठ्याँ छन उँका फ्लैट अर मकानू का ग्वेर बणी, उ बिचरा सिर्फ सोच सकदिन पर बोल नि सकदा, किलै कि उँकी बात, बिचार कैल जब मनिणी नी त गिच्चू बि क्यो खराब कन !
पैलि लाज शरम संस्कार छाया ब्योलि साड़ी बिलोज पैरी अर ब्योला धोति कुर्ता कांधमा शौल पी टी सू का जुता श्री नारायण जन ब्योला कु रूप हुंदु छा अर ब्योली मां लक्ष्मी का रूप मा बेदी मा बैठदा छा बेद पाठी बामुणु का द्वारा सबि मांगलिक कार्य संपन्न हुँदा छा उ एक अमूल्य संस्कार छा
जबकि आज ब्योलियु कु लंहगा घघरू उ बि तिरीस हजारौ ब्योलि वे घघूरू नि समाळ सकणी अर ब्योलौ सूट रैंद पैरुयुँ यदि वेका मुंडम सेहरा नि ह्वा त इनि नि पता चलणु कि ब्योला कोच किलैकि बरात म बि ज्यादा सूट पैरिकी आणा छन बेदी मा सैब ब्वना छन अबेर हुणी पंडित जी सिनक्वळि कारा अर पंडित जी बि द्वी मंत्र फूका अर खतम वे सै पैलि जै माला हुणी अर ब्योली नचद नचद आणि जन बिचरि फर झप्यटु लग्यूँ हो अर तब बरनारायण जनि माळा लेकि एथर जाँद उनि ब्योलि थै लोग उबू उठै दीणा छन बड़ी खैरी का दगड़ जै माळा हूणी असलमा जै माळा ना आजै पीड़ी नै संस्कारू थै जनम दीणा छन धीरे धीरे पाश्चयता संस्कृति की ओर अपड़ी खुट्युँ धना छन
पैली अपड़ी उत्तराखण्डी मयळदु गडवळि कुमायाँ जौंलसारी म छवी लगिदि छै अहा कन छपछिपि प्वड़दि छै जबकि गौं मा बजारूमा हिन्दी छन ब्वना जै से संस्कृति बिलुप्त हुण की तरपां बडणी च जु कि एक भारी चिन्ता वळु विषय बण ज्ञा
पैली जब क्वी नौकर चाकर छुट्टी आंदा छा त सैरा गौं का वेका ध्वार घरम जाँदा छा अर उ बि सैरा गौंमा दाना सयणौं थै स्यवा सौंळि सुख दुख पुछुदु छौ हे रां आज कब आ कब गा कै पता नी सर अपिडि गाड़ीम छन आणा अर शुर छन चल जाणा कैका ध्वार वि जाणु जैमा बोतळ बातळियु जुगाड़ च वेका अलावा अब व भयात उ प्रेम उ अपुडुपन कुछ नि रै ग्या मतलब ब्वनौ यो च कि मनखि अब उँ संस्कारू थै सायद तिलांजलि दे ग्या
अब मि आप थै बतौलू की एक परंपरा एक संस्कार जु लगभग अतिंम सांस लीणू वेका बारामा ओ च संवेदना अब यां से लोगू कु क्वी सरोकार नि रै ग्या यदि कैकु सर्वगवास हुणू त घारा का खास नजिकु का चार रिस्तदार छन आणा अर बाकि कुछ सीदा मुक दिखाणु घाट फर छन पौंछणा अर जनि मुखागनि दीणै वनि खिसकणै तयरि छन कना इन द्यशु म हुणु अर घार थब पैलि त लोग नि मिलणा छन अर क्वी आणा बि छन त संस्कार कैरी वखि बोतळ पीणा छन होटल मा खाणा छन, पर स्यामदां उँका धोरा जरा शरैल बुझाणो नि जाणा छन क्वी मतलब नी, कु म्वार क्या ह्वा पैली एक रिवाज छा संस्कार छाया दाना संयणा तेरैं तक ऊँका ध्वार जाँदा छा दुःख बंटदा छा समझाँदा छा मौ मदद करदा छा अब तेरैं खुण फोटो दगड़ तेरैं कु कार्यक्रम लेखी वाटसप मा भ्यजणा छन क्वी क्वी त ॐ शान्ति बि द्वी बाद लिखणा छन अर कतगै RIP लिखणा छन जन इन लेखी म्वरण वळु सीदा स्वर्ग जाणु ह्वालू कुल मिलैकी दिखावा जादा अर संस्कार लापता ह्वे गेन
है रे जमना कख जाणु छै तु