सर्या कुटमदरी सदनि
राजि रंयाँ
चा तुम घारम रयाँ चा
तखउँद रंयाँ
जलम भूमि थै न विसरंयाँ
घौर जनै आणा जाणा रंयाँ
जैल्य जब घौर त द्वी
थानम जगाणा रंयाँ
राजि रंयाँ सदनि,
द्यबतौं कु आशिष मिलदु रयाँ
जथू काम ह्वे साकलु
उथू कयाँ
सुदि खक्वड़ा
रकोड़ नि क्याँ
फटळि कुड़ै रणी ह्वेली
वीं बिछै दियाँ
थाती च तुमरी भारे
वीं न विसिरयाँ
जु ह्वे ल्या सच्चा गडवळि
त गौं जरूर जयाँ
क्वी भैरौ बसलु वख
वाँ से पैलि तुम समळ जयाँ
जख बि रंयाँ
सदनि रजि रयाँ 🙏



