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निरबै दिखावा : जी० एन० चमोली

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आजा मनिखम मनख्यात नि रैगी वेकी जगा अब दिखावल लियाल ! याँका पैथर केवल पाश्याता संस्कृति ही जिम्मेदार नी ब्लकि हमरु रहन सहन खाणु पीणु रीति रिवाज अर दगड़ दगड़ उँ दाना संयणों कु साथ नि मिलुणु जौंल संस्कार अर संस्कृति दीण छै ! अब हाळ त्वड़ै अर ध्याखा देखी रै ग्या जनकि

घर गौ मा जब ब्यो बरात हुंदी छै त छै मैना पैलि बटि तयारि शुरू ह्वे जांदि छै ! लखड़ा फड़ना लखड़ा सरणा राशन पाणी दूर बजार बट साग भुजी सैरा गौं का अपुडु कारिज समझि मौ मदद करदा छा! वे जमना मा पतलौं मा खाणु खयेंदु छा त माळु का पत्ता लांदा छा, ब्यखुनि भ्यलि फाड़ी कुल द्यो द्यबतों कु नौ लेकि भ्यलि बंटे जांदि छै! गैस अर लालटीना उज्यळा मा पतिलि लगिदि छै ! प्रदेशु का रौ रिस्तेदारू खुण अन्तरदेशी मा चिठ्ठी लिखिंदि छै जामा खास ब्यो मा पौंछणु खुण हाथ जोड़ी ब्वलदा छा अर अडोस पड़ोसा गौ मा डली जाँदि छै अर दगड़ पक्वड़ा बंटे जांदा छा ! ब्यो जैं मौ का घार मा हुंदु छौ उँथे फिकर हुंदी छै पर गौ करौं थै बि खुशी दगड़ दगड़ फिकर बि रैंदी छै वेबारि ब्वळदा छा भै आखिर गौ की इज्जात च त इनी सुन्दर सोच का दगड़ सर्या गौ का दाना सयणा ज्वान जमान सैब अपुडु घारौ सी काम समझी ब्यो कारिज निभांदा छा ! रौ रिस्तदार एक हफ्ता पैली बट ऐकी मौ मदद करदा छा अपड़ी अपड़ी छवीं लगिदि छै राजी खुशी पुछेंदी छै! गौं का दाना सयणो थै पूछी दाळ भिजांदा छा दिनम सैब अपड़ा अपड़ा सिल्वटा लेकी दाळ पिसणू आंदा छा सब्यूँ थै पंडित जी टीका पिठै लगांदा छा, स्वागवंती का हथन तैकै कड़ै मा तेल डळदा छा ! ब्यो कम अर अपनत्व कु प्रेम बरखुदु छौ इन लगुदु छौ जन कौथिग हुणु हो सुन्दर रस्याण अईं रैंदी छै ! बेदी खुण क्याळौ डाळु न्यूतणू बामण दगड़ ढोल दमौ जांदा छा
पूजा कैरी सोला स्तंभ बणये जाँदा छा ! जब स्तंभ पुजेंदा छा मंगलेर सुन्दर मंगळ लगादि छै अर बड़ा सुन्दर विद्यि विधान द्वारा द्यबतौं कु आवाहन हुँदु छौ कम से कम द्वी घंटा लगद छा स्तंभ पुजण मा ब्योली का बवाजि भी धोती कुर्ता मा रैंदा छा अर भौत बड़िया ढंग से स्तंभ पूजा पुरेंदी छै !

स्ममदा जन रूमक पोड़ी त गैस अर लालटेन जग जाँदा छा बरत्या स्वागत खुण गेट वणदु छा बच्चा लोग स्वागत का वास्ता तयार रैंदा छा नै कपड़ा त खालि रिस्तेदार अर क्वी क्वी गौ का पैंदा छा बाकि त सैब अपड़ा साधारण रैकी बरत्यु स्वागत अर उँका सीणै व्यवस्था आदि मा लग जांदा छा ! जब बरात दूर दिखेंदी छै त ढोल दमौ द्वी तरफ वटै शब्द बजाँदा छा जैमा सवाल जवाब हुंदा छा जनकि ब्योली का गौ बटि शब्द बज कि कतगा छौं कतगा छौ त तब उ जवाब दींदा छा कि चार बीसी पाँच छौ चार बीसी आर चार छौ अगर व्योली का गौ अबि खाणु नि तयार नि त शब्द बजुदु छौ कि रुक जा रुक जा तखिमै रावा त हैंकि तिरपां बटि जवाब मिलदु छौ हो हो तयरि कारा फटा फट तयरि कारा फटाफट ये प्रकार से कै सवाल जवाब हुन्दा छा !
बारात पौंछण पर स्वागत अर वर पूजा बहुत ही विधि विधान का साथ मा चौकम कुछ कुर्सी खटुला मन्दिरी र्ब्या आदि विछै की कितली पर चा अर कागजै पिलेटम द्वी बिस्कुट अर नमकीन नाश्ता जाँदू छा दगड़म छच्जामा बैठी मांगळ अर बरात थै पारंपरिक गाळि दींदा छा घूलिअरगा बाद तमाम पौणा लोगु थै सफेद लिफाफ प्वटग एक रूप्या पिठै लगिदि छै वेका बाद हुंदु छौ खाणु पीणु ब्योला भी पतिलि मै खान्दु छा सैब एक समान ब्योला घोती कुर्ता पी टी सी का सफेद जुता पैरुदु छा मुंडम सिराकंगण इन स्वाणु लगुदु छौ जन सच मा श्री नारायण हों ! सुबेर फ्यारा फिरेंदा छा त व्योली साड़ी मा जन भगवती हो इनु मुंडम मुकुट हूंदू छा फ्यारौ का बाद गायदान हुंदु छौ अर गौं का लोग भी साड़ी विलोज थाली लवट्या अर क्वी क्वी रिस्तेदार परात बी दिंदा छा ! ब्योला थै वे जमना मा क्वी क्वी रेडू अर घड़ी बि दींदा छा ! भात खाणा बाद ब्योली बिदा हूँदी छै, त गौ का जनना भ्यटै भ्यटै की भौत रुंदा छा अर ब्योलि थै द्वी मील तक अड़ेथी आंदा छा ब्योली का दगड़ ब्योली कु भै दूण कंडी अर एक बक्सा जैमा लति कपिड़ि हूँदी छै वी जाँदू छा कुल अगर निचोड़ निकळै जा बड़ा ही सात्विक अर अथाह प्रेम बिना कै दिखावा कु ब्यो पूरा विधि विधान आर रीति रिवाजा दगड़ सम्पन्न हुंदु छा जबकि आज:-
सबकुछ दिखावा ह्वे ग्या अब कार्ड छपणों रिवाज बि खतम ह्वे ग्या अब मुबैल संगीत का साथ कार्ड आणु च, गेट पर बरात पौछण से पैली ब्योली का ब्बे बुबा सूट बूट मा खड़ा रंदिन न छवीं लगदि न समारूमी हूँदी लोग लिफफू पकड़ै की सीधा भीतर चाट पक्वड़ी बरगर चौमिन गोल गफा फर लग जंदिन मर्द सैब दारू पीण बैठ जंदिन ब्योला कन च कै गौं कु च क्य करद याँ से क्वी मतलब नी, उनी ब्योली बारम बि कै थै क्वी मतलब डी जे मा नचा नच रैंद हुई जनि बरात आंद त गेट फर रिब्बन लग्यूँ रैंद जन नेता जिल रामलीलौ उदघाटन या कै नीव पत्थर कु शिला न्यास कनै हो तब लड़की की दगड्या डिमांड करदिन कि ग्यारह हजार द्यावा तब अदा घंटा बहसबाजी हुंद तब म्वरदू बल क्य नि करदू बड़ी मुश्किल से इक्वान सौ दीण प्वड़दिन तब ब्योला एंचा कागज वळु पटगा फ्वड़दिन तब वखम रंगविरंगा कागजा टुकड़ा फैल जंदिन कतगै त स्प्रे कु सफेद झाग फैलंदिन मतलब ब्यो से कै थै क्वी मतलब नी अपुडु मजा पुरु हुण चैणु ब्योला अगर सोराकंगण नी पैर त इन पता लगाणु मुश्किल ह्वे जांद कि ब्योला कोच किलैकि सैब सूटबूट म अंया रंदिन हैंकि तरपां मांगिणि का बाद अचकल्यूं एक रिवाज हैंकु ए् ग्या ब्योला ब्योली प्रि विडिंग सूट छन कना जगा जगा फोटो खैंचाणा छन उ बि उल्टी सीधी जब उ पैली घूमी आणा छन त यु ब्यो कनौ दिखावा किलै कना छन बुबा बिचरू मोर ग्या नौकरी कै कै की अर इ नै रिवाज लैकि ब्वे बुबा थै कर्जम डुबाणा छन उनै घुलि अरग पंद्रा मिनट च खतम हुणू क्वी पंडिजी पैली फिट रंदिन यांमा पंडिजी कु क्वी दोष नी जब सब दिखावा ह्वे ग्या त उँल बि यखुलि बये कै क्य कन उनै लोग खाण फर पिलच्याँ रंदिन पचास बन्यूँ खाणू रैंद बण्यूँ दगड़म शिकार मुर्गा की अर बखरी कि बि चलनी रैंद अब इन जगा मा सचे आण द्यबतौल आर्शिवाद दीणू अब जब ब्योली बरमाला लेकी आंद त वींका एंच वींका भै बंद एक टैंट लेकी चलदिन जन ब्बलिंद जु टैंट पैली बट लग्यूँ वे फर दूळा हुयाँ ह्वाला यु दिखावा नी त क्या च जैबरि बरमाला हूँद ब्योला वळा ब्योला थै उठदिन अर ब्योलि वळा ब्योलि थै उठदिन जन ब्वलिंद इन दिखाणा ह्वाला कि गरू कु जि च अर वेबर अदा से ज्यादा लोग खै पेकी सीधा अपड़ घार चल जंदिन उँक भाँ अब जी हूँद तब लगद खास मेज जैमा ब्योला ब्योली अर परिवार लोग बैठदिन अर बंच्यूं खुच्यू ठंडू खाणू खंदिन अर द्वी हजार रुप्या जु खाणु खलांदिन उँ थै दिंदिन अब जु लोग पैली चल जंदिन उ बन बनी छवीं लगदिन खाणु खास नि छा जु टुंड ह्वेकि जंदिन उ ब्बलदिन मजा ए ग्या यार उँ लोगू थै ब्यो से क्वी मतलब रैंदू अब आप बतावा कि यु पैसौ कि फूका फूक दगड़ दिखावा नी त क्या च ?

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