द्वार खोलि जै रीत निभै जै, बरसु बटी की खुद बिसरै जै
जै गौं से पहचाण बणी तेरी वे गौं मा तू शीष नवै जै
जौं गदन्यू कू छालु पाणि छौ जौं रस्तो न ते पछाणि छौ
हाथ जोड़ि प्रणाम करी कि सबूं तै अपणू नाम बतै जै
पुराणा मनखी नई सड़क छन वक्त बदलि त कैन क्या कन अब
पर जब तक गौं चलदा रया छन तब तक की हाजिरी लगै जै
तुम संस्कार से छुटण लग्या छा दयो- देवतो तै भुलण लग्या छा
शोर – शराबा से छुट्टी लेकी घौर मा ऐकी कुछ सुस्तै जा
ठंडि हवा च ठंडु पाणि च अपड़ा छौंद तू रीत निभै जा
जै गौं से पहचाण बणी तेरी वे गौं मा तू शीष नवै जा



