
गुर्दे की पथरी तै निकालणे का वास्ता लोग लेजर पद्धति सी लेकर ओपन सर्जरी तलक करोणा छं। लेकिन प्रकृति न ये गलोण का वास्ता कई औषधि दिई छं। ऊमां विटि वरुण एक यनि वृक्ष छ जैका चूर्ण का नियमित प्रयोग पथरी तै गलाकर पाणी बणे देदा छ। ये का अलावा ये का छाल का लेप सी आंखों का सभी दूर ह्वे जाणा छं।
गुर्दे मां पथरी हो या फिर नेत्र रोग अथवा कै भी प्रकार कु मूत्र रोग सभी रोगों का वास्ता वरुण रामबाण छ। येकु वानस्पितिक नाम क्रेटिवा नुर्वाला छ। जैसी अंग्रेजी मा टेंपल प्लांट ब्वली जाद छ। यु कैपेरिडेसी कुल कु पौधा छ। भारत मा वरुण तै वरना, वरुन, वर्ना, वरणों आदि नौ सी भी जाणी जाद छ। ये वृक्ष कु वर्णन चरक संहिता मां भी देखणा तै मिलणा छ। यु पौधा भारत का मध्य क्षेत्र बंगाल, आसाम, कर्नाटक, तथा उत्तर भारत के सभी मैदानी क्षेत्रों मां पाई जाणा छ।
नेत्र, मूत्र, पथरी का वास्ता रामबाण औषधि कु काम त करोणा ही छ दगडी ही गंड माला, उदर रोग किडनी, आमवात जनी रोगों तै दूर कने की क्षमता रखणा छ। ये का पत्ता, छाल, जड़ अर गोंद सभी उपयोगी छ। अप्रैल माह मा काजू सी सफे द रंग का फूलों सी लदा यु वृक्ष लोखुं का मन मोह लेणा छ।वरुण की छाल का लेप आंखों का बाहर सी लगोण सी जटिल से जटिल नेत्र रोग मा लाभ मिलणा छ। छाल का चूर्ण बणेकी सुबेर शाम-शाम द्वि चम्मच जल का दगडी चूर्ण लेण मा गुर्दे की पथरी टूट कर पेशाब का रास्ता भेर निकल जाणी छ। किडनी का संक्रमण मां ये कु क्वाथ पीना लाभ दायक होणा छ।


