
उत्तराखण्ड मा पर्यटन भौत खजनू च। यख चारधाम, मंदिर, नदी, नैसर्गिक सुंदरता राफ्टिंग अर झील, ताल सब्ब छन। उत्तराखण्ड मा हर साल लाखों यात्री ऐ करदन, जै से उत्तराखण्ड राजस्व बढदू। उत्तराखण्ड मा जथगा पर्यटक ऐ करदन उंक रण सण द्वी चार दिन कुणी जरूर हूंद। अगर उत्तराखण्ड मा आण ह्वाळ पर्यटकू तै पहाड़ी व्यजंन परोसे जाव त ये से उत्तराखण्ड क पहाड़ी व्यजंन तै बढावा मिलल।दक्षिण भारत मा वख उत्तरी भारत व्यंजन बड़ू मुश्किल से मिलदन लेकिन उत्तराखण्ड मा इडली, ढोसा, सांभर सब्ब उत्तराखण्ड होटल अर रेस्टोरेंट मा मिल जंदीन। अगर उत्तराखण्ड रेस्टोरेंट मा क्वी एक भी पहाड़ी व्यजंन अगर पर्यटकू तै सुंदर ढंग से परोसे जाव त जरूर उ भी लोकप्रिय स्वादिष्ट व्यजंन बण सकदन। उत्तराखण्ड हर होटल मा, रेस्टोरेंट मा पहाड़ी व्यजंन खाण अनिवार्य करे जाल त पर्यटक वै तै जरूर खाल। पहाड़ी व्यजंन जन फाणू, चैसवणी, भटवणी, चून, पिटवणी थिचवणी बणये जाव। उत्तराखण्ड मा भंगलू, जख्या, तड़का अर तिल, अर भंगजीर चटनी बणै कन एक होटल मा मैनेजमेंट जणी परोस जाव त जरूर पर्यटकू तै पंसद आल। आज एक तरफ जक चाईनीज फूड खैकन बच्चा येक आदि हूणा छन अगर उत्तराखण्डी व्यजंन तै भी ये तरीका से परोसीकन अपर उत्तराखण्ड क व्यजंन तै बढावा दिये जै सकदू। गर्मियूं बगत मा कोल्ड ड्रिंक जगहा मा बुरांस जूस, माल्टा जूस पीलये जाव।उत्तराखण्ड मा अगर होम स्टे योजना परवान चढद त सरकार तै ये मा जू भोजन मेहमानू तै परोसे जाव वैमा एक या द्वी चीज उत्तराखण्डी व्यजंन तै जरूरी करे जाव। यनी उत्तराखण्ड मा झंगोरा खीर तै स्वीट डिश मा दिये जाव त ये से हमर उत्तराखण्ड मा पहाड़ी नाज तै फिर दुबर से संजीवनी मिल सकदी। आज उत्तराखण्ड मा दिखण मा आंद कि चाईनीज फूड, दक्षिण भारत इडली डोसा उत्तराखण्डी लोगूक भी पंसद बणद जाणा।
अगर यूं दगड़ी उत्तराखण्ड व्यजंन तै भी एक नै तरीका से परोसे जाव त जरूर यी भी पूर देश अर दुन्या मा प्रसिघ्द्ध अफी ह्वे जाल। उत्तराखण्ड होटल मैनेजमेंट मा प्रशिक्षकू तै उत्तराखण्डी व्यजंन बणाण क विषय मा रखे जाव। उत्तराखण्ड क कै भी व्यजंन तै राजकीय व्यंजन घोषित करी कन उत्तराखण्डी व्यंजनू तै जरूर बढावा मिल अर स्थानीय खेती अर लोगू तै रोजगार भी उपलब्ध ह्वाल।



