
कै भी क्ष्ेात्र का अगने बढण का वास्ता शोध चर्चा परिचर्चा का अलावा एक वैज्ञानिक सोच कु होंण अति आवयश्कता च। उत्तराखण्ड मा पर्यटन गतिविधियों मा कनके बढयेत्तरी हो। मूल भूत सुविधोमा कनके सुधार हो । येका वास्ता सरकार व पर्यटन ब्यवसाय से जुड्यां लोगू का बीच आपसी संवाद, साधनों कु सदुपयोग पे गहन अध्ययन की जरूरत च । उत्तराखण्ड मा चारधाम यात्रा का बाद, हर कारोबारी जेकी रोजी रोटी सिर्फ चारधाम यात्रा पे निर्भर रोंदी। सरकार की नजर अब चारधाम यात्रा का बाद लोगू तें रोजगार सुलभ कना का वास्ता शीतकालीन यात्रा कु रोडमैप बणोंण पे लगीं च । किलैकी पूरा पहाडी जिलों मा जख भी चारधाम यात्रा चलणीं च, अब यात्रा सीजन बन्द हूंण से लोगूं का सामणी रोजी रोटी कु संकट खडू ह्वेगी । ये संकट कु समाधान का वास्ता सरकार की तरफ विटी प्रयास हूंणु कि जख भी शीतकालीन यात्रा की संभावना च वख मा सभी मूलभूत सुविधों तें जोडी करि शीतकालीन यात्रा कु शुभारम्भ ह्वे जो। केभी क्षेत्र की आर्थिकी तभी फलीभूत ह्वे सकदी । जब लोग अपणां क्षेत्रों की वास्तविक जानकारी रखला, कि हमारा क्षेत्र की विषेशता क्या च । तब हम अगर अपणां क्षेत्र का वास्ता सरकार से पर्यटन मद मा धनराशि की मांग करि सकदा । तब सरकार तें विशेषज्ञों की राय से वे क्षेत्र का विकास तें काम कन चैंदी । किलेकी आम जन की सहभागिता से ही पर्यटन क्षेत्रो कु विकास संभव च । पहाडी क्षेत्र विषेश तोर पे हिमालयी क्षेत्र की विषेश भौगोलिक परिस्थितियां ये बात कु संकेत देंदी, कि हम पर्यावरण का अनुकूल अपणां उद्योग घंधो तें शुरू करू। जेसे आय का संसाधन भी बढला और लोग अपणां स्वरोजगार से भी जुड्यां रोला । शीत कालीन यात्रा कु प्रभाव से आम किसान भी लाभान्वित होलू। आम काश्तकार की रोजी रोटी भी चलली। आम लोगू का द्वारा जु भी उत्पाद निर्मित होलू, यात्रीगण वेतें खरीद करि आम लोगूं की आर्थिकी मा चार चांद लगे सकदू। शीतकालीन यात्रा की हमारा क्षेत्रों मा अपार संभावना च। दूर दराज का क्षेत्रों मा दर्शनीय बर्फीला बुग्याल, हिमाच्छाादित श्रृंखलाए, झील, ग्लेशियर व के प्रकार का जंगली जानवर, जु पर्यटको तें अन्त तक अपणि तर आकर्षित करदा। हमारी सरकार व पर्यटन विभाग की नजर यांे पर भी रोंण चैंदी । अभ्यारणों से भी शीतकालीन पर्यटन तें बढावा मिल सकदू । लेकिन सरकार तें येमा कै पहलुओ पे ध्यान देंण पडलू। जेसे पर्यावरण व ईको सिस्टम मा क्वे गडबड न हो। पहाडी खंाणु एकदम शुद्ध आर्गेनिक च, स्वास्थ्य का वास्ता लाभदायक च। शीतकालीन यात्रा का कै पडाव छन । जख मा भी अगर आप चांदा कि यात्री मेरा दरवाजा पे ऐजो । यात्री पहाड घुमणों तें तैयार च । बस आप ते सत्कार कन ओंण चैंदी । लोकगीत व संगीत भी शीतकालीन यात्रा तें काफी आकर्षित कर सकदू। पहाडों मा फोक गीत व संगीत की भरमार च । किदवंतियों आंणा पखाणा से लेकरि झुमेलो की कै सिरीज तैयार ह्वे सकदी। ब्वनो मतलब च कि शीतकालीन यात्रा का वास्ता हमूमां अपार खजानू च । बस शिल्पी चैंदी जु यों खदानों तें खेादू। वेतें पछ्यांण्ने की क्षमता धरू । उम्मीद करदा कि पहाड का वासी यों पहलुओं पे काफी सकारात्मक विचार रखला । जेसे शीतकालीन पर्यटन आंण वाल दिनों मा रोजगार का दगडा हमारी देवीय संस्कृति तें भी दूर दूर तक पोंछांण मा सहायक ह्ोली।



