बात बिल्कुल सचि च और परिवार से जुड़ीं च, ये ही वजै से कुछ नाम काल्पनिक छन !
बात उबरि च जैबरि फून नि हुन्दा छा एक मात्र सारू अपड़ी बात पौंछाणों रैबार या चिट्ठी हुन्दी छै ! रैबार कुछ खास हो त कै खास आदिमम ब्वले जाँदू छौं ताकि उ लूण मरच रळै कि नि ब्वाल !
त सच्ची घटना या च कि हमरा गौंका एंच एक गौं च, वे गौंकु नौनु चौदकोट पड़दु छा, म्यारा बुबजी चलण फिरण से लाचार छाया! चिट्टी लिखद दां बि हत कौंपदा छाया ! उँकि नौनी जणदा ( काल्पनिक) ज्वान ह्वे गे छै, त बामणाल एक जगा जन्मपत्री मिला अर ब्वाल कि नौनू बल सरकरि नौकरी फर च! वे टैमा मनिख मयल्दु अर सरल हुन्दा छा जु बामणल बोल याल सनझो वृह्मा जी का वचन छन !

नौनै जन्मपत्री मा असलेखा नक्षत्र छौ, पर बाबजी ल बामणा ब्वन फर हाँ बोल द्या न नौनू द्याखू न घरबार द्याखु न गौं द्याखू अर स्यु ह्वे तयरि मांगण कनै, तैबरि हमरा गौं का एंच जु गौं छा वखौ एक नौनू पड़दु छा चौंदकोट वेल बुबाजी मा रैबार ब्वाल कि संगरदि का दिन नौना वळा मांगण कनू आला ! रैबारा आधार पर बुबजिल नौनौं खुण चिट्ठी ल्याख कि जणदा का मंगदरा आणा छन संगरंदि कु त तुम ब्यटा झट घार पौंछा अर सैब तजबिज कारा ! वे जमन नौना डिल्ली थबै चपड़सि सपड़सि लग्यां छा त सबि भै अपुडु अपुडु तजबिज कैरी घार पौंछिन ! कुङू लिपेगे चौक मंगौ मोळ साफ करेगे राशन पाणी घरेंगे, बात इन छै कि बड़ी बैण्यु टैम पर कुछ नि ह्वे छौ स्वाच कि किलै न इबरि घूमधाम से मांगण करे जा सैरू गौं खाण फर न्यूते गे अर खूब तयरि करे गे 50 त कुर्सी लगये गेन दरी मंदिरी गैस सैब इंतजाम जतगा ह्वे सक्दु छौं करेंगे स्यु साब संगरंदयु दिन बि आयु ! सुबेर बट भुज्जी कटे दाल ड्यागा मा उज्याण धरे गे पाणी सरीण बैठ ग्या मतलब तयारि पुरु जोर शोर से ह्वे गे! श्यामदां पंडित जी भी सफेद टवपिलि मुंडम धैरी गों मा पौंछ गेन ! हुका पाणी का बाद चौकिलि बामणल मांग शुरू ह्वे साब गणेश बणनू करते कराते रुमक पोड़ ग्या पर मंगदरा नि पौंछा ! जणदा भितरै भितर परेशान अर वींका मां पितजी भी उदास सि हुण बैठ गेन अर जणदा का भै आपस मा सौ सलाह अर चिन्ता का दगड़ स्वचण बैठ गेन कि आखिर राति का 8 बज गेन उ लोग आ किलै नि छन तैबरि गौ का एक दान आदिमल ब्वाल ब्यटा इन कारा कि राशन पकीं च गौं करौं थै खलै दयवा , दूरै बात अर उकळियु बाटु च जैबरि बि पौंछला लेकिन पौंछला जरूर अर नि पौंछला त खोज खबर कला! उँका ब्वन फर गौं वळौं थै खाणू खलयेगे पर मंगदरौं क्वी अता पता नि चलू! गौं क सैब चल गेन, रैगेन कुछ दाना सयणा अर परिवारा लोग आपस मा बिचार सला ह्वे अर फैंसला ह्वा कि उँकि खोज मा ज्वान जमान 4 आदिम भ्यजे जांवन स्यु साब एक जणदा कु बडु भै अर द्वी आदिम ज्वान जमान लालटिन अर टौर्च लेकि रस्ता लग गेन उनै जणदा का मन मा कै अशंका जन्म लीण बैठ गौ का बि सैब से गेन लेकिन जणदा का मां पितजी ठग्यां सि सैरी रात बैठ्या पर कखी क्वी अता पता नि चलि! उनै हैंकि चिन्ता कि ईं राति नौना बिचरा कनक्वे ह्ला जाणा कै किस्मा घंघतोळ मनमा चलणा स्वचदा स्वचदा रात कैबरि बीत पतै नि चलू अर धारम बियण्य दिखिण बैठ ग्या तैबरि जणदा बुबजिन जणदै ब्वे कु ब्वाल अरे एक कुळा चा त बणै दे ! युंकु बि चाकु कुळा उनै नौनौ कि खबर सार नी युँ थै चाका कुळै लंगी ब्वलद ब्वलद उठ ! ल्या प्या सीं चा, उनै सरया राती बैंठी जणदा थै बि ऊंग आण बैठ कैबरि वीं निंद आ बिचरि थै पतै नि चलू! डांडी कांठ्युं घाम एगे पर नौनौ नि आया गौ का लोग अपड़ा अपड़ा काम धंधौ फर लग गेन क्वी घौर मा एनी ! क्या ह्वा जी नौनौ कि या मंगदरौं क्वी खबरसार जणदा बुबाल ना मा मुंड हिलै अर ब्वे रुण बैठ गे ! ब्वारि तुम क्य छौं रुणा भला काम म अरे ख्वजदरा जंया छन ये त जाला ! ब्वरि ब्वन बैठ फूका जिवरो मंगदरा नि बि आंदा त क्वी बात नी कौन से हमरि जणदा बुडेगी पर भलौ उ नौनै ले खूब ह्वाला!
बात कनै लग्यां छा तैबरि देवी मन्दिरै समणी सात आठ आदिम दिखे गेन ! एथर हिटणु जु उत ब्वलिंद म्यारू केशु ह्वालु इतगा सुणदै जणदा चम उठ अर छज्जा किनर बट अपडा भैजी देखी खुश ह्वे अर अपड़ी माँ फर भ्यटै कै रूण बैठ गे ब्वेल जणदा बुथ्या अर तैबरि सबि मंगदरा और नौना चौकमा पौंछ गेन! दमौ बज गे स्यवा सौंळि रामा रूमी ह्वा, पंडित- जिल बी स्यु पुजै तयरि शुरू कै दे ! उनै जब केशु ल उँका ब्याळि नि पौंछणौ कारण बतै त पता चल कि उँल त क्वी रैबारी नि दे छा ! हाँ उ बि मांगण्यु तजबिज कना छा पर थोड़ा रुकि कै ! चा पाणी का बाद गणेश पूजन शुरू ह्वे अर जणदा स्वसरस्यूँल गुलबंद पैरै अर मांगण सकुशल संपन्न ह्वे जणदा भयुँल बि लती कपड़ी भांडी कुंडी लीणी दीणी खूब सुन्दर कै !
खुशी म सैब भूल गेन कि आखिर वे नौनल झुटु रैबार क्यो द्या सब भूल गेन बात गई रात गई लेकिन झूटु रैबार से सच्ची घटना ह्वा ! मांगणी का ठीक 6 मैना बाद जणदै माँ कुं अचानक स्वर्गवास ह्वे गे! घर गौं मा जतगा मुख ततगा बथा क्या बात ह्वे ह्वेली ! फिर बामण से पूछेगे कि आखिर जन्मपत्री त ठीक से मिलै येल छै कि ना? बामणल ब्वल जन्मपत्री ठीक छै पर मिल लड़कै जन्मपत्री टक लगै कि नि देखी, लड़कै की जन्मपत्री मा त असलेखा च जु सासू खूण ठीक नि हूँद बल! चला अब क्य बोल सक्दौं जणदौ संजोग सैद इनि रै हो !
सालभर बाद जणदौं ब्यो खूब घूम धाम से ह्वा समय कटिदि गै जणदा का द्वी बच्चा छा, एक दिन बिचारि घास कटद दां भ्याळ बट लमड ग्या अर बिचारि भरी जवनिम सदनि खूण शांत ह्वे ग्या
आखिर झूटु रैबार सच्ची घटना थै घटै ग्या


