
जनि गढवाळ धीरे धीरे रीतू हुण बैठ अर मनिख फ्लैटूम जुगता रैगेन त भूत नमान बि हरचण बैठ गेन कबि कै जमन छवीं लगिदि छै वे रौल जनै त दिन द्वफरि जाणम बि डैर लगद हाँ भै सच ब्वना छौ तुम, ब्यळि मिल बि चिता छड़म जन ब्वलिंद गारा धोळ ह्वाला कैल मि लखडौं खुण जयुँ छा अर तब सुण्या स्वीस्याट जन ब्वलिंद गाड ये हो डैरल च्वाळा पोडगेन प्वटग! द, न पूछा बुनै धौ सनकै औं धारम! जनि जरा गौं दिख्या तब आ पराण जिकुड़म ! द भूलि ओद बि नि गाड वे रौलै मेरि नणद नि अडगटै छै परारा साल, हाँ बै द हे रां दा क्या नि का वींका बुबाजिल, व त धौ सनकै बच अयेड़ लग छै बल वीं फर पैली उँल सैब जगा दिखा बल डाक्टर म, पर छोरी बुरी कसम जु जरा फरक पोड़ ह्वा ! तब बुला उँल नौळी कु जगिरि हाँ बै भारि खर्च का उँल ! काळू खाडू काळू मुर्गा तब पैलि बल गस गडै, अर दीन द्वफरि पूज बल उँल अयेड़ पर कतगा नाच ग्या तुमरि नणद उँकु सर्या चौक भ्वरे गे छा अब कन च वा ?
द भूलि वे दिन बटै त उँका सुन्दर दिन एन बल अब देरादूण त बणै याल बल ऊँल मकान अपड़ा जिठणा बगल फर अरे इनै सुणदि गांवे फुंडै जै कै नीच उ बडू भारी डांग जखम बटै सीदा नजर घाट पर प्वड़द ! चुप रा यार बौजी उखै छवीं नि लगावा, सुणले सूणी केल खाणै तु भैका सौं झुमझुम रुमक प्वड़नी छै मिल घासै फंचि जनि उठा तैबरि सर मेरी नजर जु नि गै अर वे घाट फर एक लम्बू अघेड़ सि चट सफेद कपड़ा पैर्यां वेका अर चम उठ उ खड्ड, अर सर बण वख सफेद घुँवा की लूंग पर कन तबा द भूलि न पूछ मिल बि थू पण्य ब्वाल त्वे उँद अर फंचि उठै कि सीदा घौर! चुकापट अंध्यरू ह्वे गे छा मिल फंचि चौकम ध्वाळ अर तैबरि कांडा लग्यां एक त हमरू नि यकुल ख्वाळ, हां भै हां बोल लेदि अर क्वलण पैथर बटै रुणै आवज मि झस झसुगु पैलि मिल स्वाच स्वसरजि ह्वाला पर तैबरि उँकि खसणै आवज भितर बट सुणे ग्या द भुलि ह्वा म्यार खुटौ झमझ्याट अर मि विसुध! तब बल मुल्या ख्वाळा स्वसरजि बुलैन उँल रंगुणु मंत्र बल जरा फरक ह्वा पर फेर फजल जख्यो तखि तब स्वसरजि मी लेकै चौल्युसैण डॉक्टर म गैन पर बुरा कसम जु फरक पोड़ ह्वा तब कख कख नि गा बुन कुरदर रामनगर जैल जखि ब्वाल पर छोरी मजाल जु फरक पोड़ हो तब बल मरता क्या न करता तब गैनी श्रीकोटखाल नवरया म तब पता चल कि ब्वारि फर बल खबेश लग्यूँ च द छोरी तब स्यू सैरी कुटमदरी घार बुलैन! तब खबेश पुज्या बड़ी मुश्किलन ठीक हूं। तुम अब कख रदौं बौजी ? अब हम चन्डीगढ़ रंदौ बौजी वख बि हुंदिन खबेश अयेड़ अंछिरि छंछरि बाण मसाण अरे न भै ना अरे वख क्वी डैर भौ नी हुंदू इन कुछ!
अब गौ का लोगून गौंम मन्दिर वणाणे योजना वाटसैप का . माध्यम से सैरा गौंका लोग ज्वडनि अर करार ह्वा कि गर्मीयुँ मा बच्चों कि छुट्टी टैम पर संजेती द्यबता पूजै ह्वेली म्याळग 1000 रुप्या हर कमाण वळु द्यालू काररा हिसाब से पुजै शुरू ह्वा पर क्वी नि नाचू एक सुदि नाच त धामिल ब्वाल करछुल धारा भट्टी प्वटग जु नचणू छा उ बि चुप डारा मार बैठ ग्या !
श्याम दां द्यशु बटि अंया घुमणू चल वल्या पल्या धार अर क्वी गदन मरघट तक! स्यु साब अचकाला छवरा छोरी रात पवडयाँ एन! त एकन पूछ दे, हे खड्याण करौं इ राति आणा छौं तुम थै भूत नि लगू रै ? तब एक बुड्या जिन ब्वाल बुबा जब कै वर्ष बटि गौंम मनिख नि छन भूतुल लगुण कै फर छा अर इतगा साल बट भूत बि भूल गेन कि उँल कैफर लगुणु बि च बल्कि आज त भूत बि डैर गे ह्वाला कि इतगा मनिख अचाणचक कख बट एनी अरे अब भूत कै फर नि लगुदु ! वे पता च कि गौं त खालि ह्वे गेन अगर क्वी दानू यखुलि रैणु अर उ वे फर लग जालु त भूत थै पता च कि जब ये खुण एक बेळी खुद कुछ नी त, येल काळु मुर्गा मी खुण कख बट लाण ! ये वजै से जन गौं का मनिख हरचिनि तनी भूत अयेड़ मसाण अंछिरि छंचिरि अलै बलै सैब हरचि गेन अब रैगेन त टुट्याँ कूडौं फर झूटा ताळा !



